दुर गगन में

दुर गगन कि बात निराली,
कभी देखा चंदा कि होशियारी,
रोज़ बदलता रूप अपना,
जैसे जाना हो उन्हें ससुरारी,
टिम टिम करते तारों के बीच,
चमकें जैसे जुगुनू के बिज दिए जलाए,
ऐसा लगता चांद हमारे,
देखो कितने प्यारे प्यारे,
प्रेमी के मन को तड़पाते,
खुब शरारत इनको आती,
दुर गगन में चांद हमारे,
देखो हमको प्रेम सिखाएं,
शांत, शीतलता का पाठ पढ़ाएं,
सबको ख़ुशी रेहाना सिखाएं

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