दुर्मिल सवैया :-- चित चोर बड़ा बृजभान सखी - भाग -3

दुर्मिल सवैया :–
चितचोर बड़ा घनश्याम सखी – भाग-3
मात्राभार :–
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जब कंस वधे सब काम सधा
नर नार सभी जयकार कियो !

नर रूप धरे भगवान यहां
जग तारण को अवतार लियो !

जलपान किया प्रभु नें रति का
सब नार अभागन तार दियो !

मन में उमड़े व्यभिचार हरो
भर दो उंजियार हरो तम को !

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