.
Skip to content

दुनिया खेले खेल

बबीता अग्रवाल #कँवल

बबीता अग्रवाल #कँवल

गज़ल/गीतिका

December 2, 2016

दुनिया खेल खेले यूँ जैसे कि मदारी है
इस जहाँ में लगता है हर कोई जुआरी है

खुशबुओं की आहट है बुलबुलों की चाहत भी
खिल गया गुल देखो हवाओं में खुमारी है

गा रहा मौसम भी , सब परिंदे गाते हैं
महके महके फूलों की हर तरफ क्यारी है

साथ में बहारों के आई रुत न्यारी है
है कहाँ से आई ये बहारों की सवारी है

दूर हो गया सनम मेरा दर्द ये तो भारी है
आज फिर हवाओं मे एक बेक़रारी है

Author
बबीता अग्रवाल #कँवल
जन्मस्थान - सिक्किम फिलहाल - सिलीगुड़ी ( पश्चिम बंगाल ) दैनिक पत्रिका, और सांझा काव्य पत्रिका में रचनायें छपती रहती हैं। (तालीम तो हासिल नहीं है पर जो भी लिखती हूँ, दिल से लिखती हूँ)
Recommended Posts
ग़ज़ल( समय से कौन जीता है समय ने खेल खेले हैं)
ग़ज़ल( समय से कौन जीता है समय ने खेल खेले हैं) अपनी जिंदगी गुजारी है ख्बाबों के ही सायें में ख्बाबों में तो अरमानों के... Read more
आओ बच्चो खेले खेल
आओ बच्चो खेले खेल घोडा,बिल्ली और ये है रेल बड़े अज़ब के है ये खेल किस्म किस्म के है सब खेल आओ मिलकर खेले खेल... Read more
जो सरहद पे जाए ...
हवाओं में महके कहानी उसी की | जो सरहद पे जाए जवानी उसी की | सभी से जो बिछड़े सो घर बार छोड़ा, वतन की... Read more
बाल कविता
Santosh Khanna गीत Oct 12, 2017
बाल कविता बच्चों को दिवाली उपहार देखो खेले मेरी मुनिया भांति भांति के सुंदर खेल। कभी उछाले गेंद हवा में कभी पलंग के नीचे डाले... Read more