दुनिया को हादसों में,,

दुनिया को हादसों में गिरफ़्तार देखना।
जब देखना हो दोस्तों अख़बार देखना।।

फिर उसके बाद शौक़ से बेअत करो मगर।
पहले अमीर ऐ शहर का किरदार देखना।।

उसकी तरफ है अम्न का परचम लगा हुआ।
लेकिन मेरा वो ख्वाब में तलवार देखना।।

निस्बत है हमको तीन सौ तेरह से आज तक।
मुम्किन नहीं के हमको पड़े हार देखना।

वो शख्स क्या गया मेरी बिनाई ले गया।
में जिसको चाहता था लगातार देखना।।

अशफ़ाक़ तुमको याद है मग़रिब के बाद में।
जाना छतों पे चाँद के रुख़्सार देखना।।

अशफ़ाक़ रशीद।।

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