कविता · Reading time: 1 minute

दुख के उस आलम में | हम गुमसुम से रहते हैं ||

दुख के आलम में |
हम गुमसुम से रहते हैं ||
ना किसी के हम सुनते हैं |
ना ही किसी से हम कुछ कहते हैं ||
दुख के आलम में |
हम गुमसुम से रहती हैं ||
दिल की हर बातें |
हम दिल में ही रख जाते हैं ||
रो पड़ते हैं हम उस दिन |
जिस दिन वह याद आते हैं ||
दुख के उस आलम में |
हम गुमसुम से रहते हैं ||

😓 Pawan Yadav👍

4 Likes · 2 Comments · 46 Views
Like
9 Posts · 405 Views
You may also like:
Loading...