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दुखता दिल

बृजेश कुमार नायक

बृजेश कुमार नायक

कविता

February 14, 2017

कूड़ा जी औ बुधि-सागर में
थोड़ा यौवन के आँचल में
बढ रही व्याधियाँ-काम-दोष
शोषण सद्आत्मा का घर में
पौरुष बोलूँ या पागलपन
आँगन में चीख सुनी मैंने
छल-ईर्ष्या-दंभ दोपहर की
चल रही हवा जब साँय-साँय
दुष्कर बचना ,अतिशय मुश्किल
जीवात्मा दिखती कुछ चुटैल
दिख रहा न सुखमय साहिल है
जीवन है या दुखता दिल है

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

Author
बृजेश कुमार नायक
एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर,... Read more
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