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** दुआ करते हैं ***

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

कविता

March 12, 2017

ग़मज़दा हम हैं जिनके ग़म से

उनके मनसूबे ना पूछो हमसे

वो कत्ल करते तब भी अच्छा

ग़म तो इस बात का है हमको

उसने जिन्दा भी रखा तो ऐसे

अब ना जीते हैं ना मरते हैं

बस मौत अपने आगोश में

ले ले मुझको दुआ करते हैं ।।

?मधुप बैरागी

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Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल 13.7.2017 स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना... Read more

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