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दीवाली

इंदिरा गुप्ता

इंदिरा गुप्ता

कविता

October 17, 2017

दीप अवलि किजगमग ज्योति
धरा पर जब मुस्कायेगी
अमावस्या की अंधियारी
स्वयम दूर हो जाएगी ।
दीप नेह के ऐसे बालो
हृदय हृदय से मिल जाये
मतभेदों का टीम भागे
बैर घृणा न राह पाये ।
तभी दिवाली अर्थ पूर्ण हो
जीवन सबका सार्थक हो
मानवता जागृत हो जाये
अखण्ड हमारा भारत हो।।

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