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दीवारो के भी कान होते है।

Vindhya Prakash Mishra

Vindhya Prakash Mishra

कविता

July 26, 2017

किसी के महल भी सूने
किसी झोपडी के मकान होते है
महल मे भगवान रहते है
झोपडी मे इंसान होते है
मंदिर है जहां भगवान होते है
मस्जिद मे सदा रहमान होते है।
चेहरे पढना सीख लो विन्ध्य
यहां सज्जन के वेश मे शैतान होते है।
समझकर मांगिये मदद अमीरो से
मदद करते कहां है बडे गुमान होते है
शांत रहते है कभी याद नही रहती शक्ति
देखो इसी समाज मे कई हनुमान होते है।
चुपचाप छिपाया है ताकत अपनी
बोलते नही दिल मे कई तूफान होते है
गरीबी का मजाक उडाते है मदद नही करते
कैसे कैसे लोग धनवान होते है।
सम्भलकर बोलिये जनाब
यहा दीवारो के भी कान होते है।

Author
Vindhya Prakash Mishra
Vindhya Prakash Mishra Teacher at Saryu indra mahavidyalaya Sangramgarh pratapgarh up Mo 9198989831 कवि, अध्यापक
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