दीवाने थे हम

कहते कहते दिल की बात थम गई
सांसों को संभाला ,अचानक दिल की धड़कनें बढ़ गई।

अरमान थे कई दिल में मचलते
अफसाने थे कई सांसों में पलते

दीवाने थे हम मगर इस दीवानगी की थी हमें ना खबर
परवाह न किसी की परवाने की तरह चल दिए

बेखौफ जिंदगी की दो राहों पर निकल दिये ।
चिलचिलाती धूप न बारिश का कोई असर हुआ

हमें तो खबर न थी पैरों में चप्पल ही नहीं
एहसास तो तब हुआ जब कांटा चुभने का दर्द उठा

न जाने क्यों वह दर्द भी अपना सा लगा
चलते चलते इन राहों में निकल जाना सपना सा लगा

हम तो अकेले ही सफर पर निकल दिए
इंतजार एक हमसफर की कांटों पर चल दिए।

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 2 Comment 3
Views 15

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share