दीवाने थे हम

कहते कहते दिल की बात थम गई
सांसों को संभाला ,अचानक दिल की धड़कनें बढ़ गई।

अरमान थे कई दिल में मचलते
अफसाने थे कई सांसों में पलते

दीवाने थे हम मगर इस दीवानगी की थी हमें ना खबर
परवाह न किसी की परवाने की तरह चल दिए

बेखौफ जिंदगी की दो राहों पर निकल दिये ।
चिलचिलाती धूप न बारिश का कोई असर हुआ

हमें तो खबर न थी पैरों में चप्पल ही नहीं
एहसास तो तब हुआ जब कांटा चुभने का दर्द उठा

न जाने क्यों वह दर्द भी अपना सा लगा
चलते चलते इन राहों में निकल जाना सपना सा लगा

हम तो अकेले ही सफर पर निकल दिए
इंतजार एक हमसफर की कांटों पर चल दिए।

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