.
Skip to content

दीवानी

MANINDER singh

MANINDER singh

कविता

September 12, 2016

जुदाई तेरी,
मुझे जीने नहीं देती,
यादें तेरी,
मुझे मरने नहीं देती,
ऐ कम्भख्त,
तूने किस मोड़ पर ला छोड़ा,
मेरी मुस्कराहट,
मुझे रोने नहीं देती,
तेरे वादे,
चुभते है शूल बनकर,
ये कैसी,
दुआए दी तूने,
जो कभी पूरी नहीं होती,
लगा दिया तूने,
ये रोग कैसा,
जिसकी कोई दवा नहीं होती,
अपनों में हु,
पर अपनों से दूर हु,
सिवा तेरी यादों के,
किसी और से बात नहीं होती,
तू जहाँ भी रहे,
खुश रहे,
क्योंकि हर किसी के,
हिस्से में वफ़ा नहीं होती,
बहुत हुआ,
रोना धोना,
चल तू ना सही,
कोई और सही,
जिंदगी एक जगह,
ठहर नहीं होती,
गर रोता रहता “मनी”
तेरी यादों में डूबकर,
तो शायद,
आज उसके लफ़्ज़ों की,
दुनिया दीवानी ना होती,

Author
MANINDER singh
मनिंदर सिंह "मनी" पिता का नाम- बूटा सिंह पता- दुगरी, लुधियाना, पंजाब. पेशे से मैं एक दूकानदार हूँ | लेखन मेरी रूचि है | जब भी मुझे वक्त मिलता है मैं लिखता हूँ | मशरूफ हूँ मैं अल्फ़ाज़ों की दुनिया... Read more
Recommended Posts
मसहूर दीवाना
gautam verma शेर Nov 12, 2016
"चाहत ने तेरे मुझे इतना मजबूर कर दिया कि आशिकों के नाम में मुझे मसहूर कर दिया, दूर हुए थे तो अपनों से तुझे पाने... Read more
ऐ बचपना
ऐ बचपना, मुझे जाने दे आगे बड़ना है मुझे तेरी मासूमियत को छोड़कर मुसीबतों से लड़ना है मुझे तू बहुत नादान है मेरे चेहरे की... Read more
माँ मैने क्या कसूर किया
माँ मैने क्या कसूर किया जो तुने मुझे छोड दिया एकांत में मरने के लिए इस बीहड़ जंगल में डाल दिया में तो चाहती थी... Read more
छुआ जब से मुझे तूने
लगी है आग तनमन मे छुआ जब से मुझे तूने बड़ी बेचैन है साँसे छुआ जब से मुझे तूने मनाया लाख दिल को मैं मगर... Read more