दीया एक जलाना है

घोर अंधकार मिटाना है
तो दीया एक जलाना है।
निराशा का तिमिर हटाना है,
तो आशा का दीया जलाना है।

एक-एक से अगणित होंगे
जन-जन को यह समझाना है,
साम्प्रदायिकता के तम को भगाकर
एकता का दीया जलाना है।

काली अँधेरी दुख की रात में
खुशियों का दीप जलाना है।
नफ़रत की भभकती लौ को बुझाकर,
प्यार का दीया जलाना है।

दिलों में जोश जगाना है
तो उत्साह का दीया जलाना है।
सफलता का बिगुल बजाकर
मेहनत का दीया जलाना है ।

मानव प्रकृति से भिन्न नहीं है
कुदरत का मान बढ़ाना है।
श्रद्धा, क्षमा, समर्पण भाव का
एक दीया ज़रूर जलाना है।

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खेमकिरण सैनी
बेंगलूरु

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