दीप बनकर मैं, घनी -काली निशा में जल रहा /इसलिए कठिनाईयों का खल मुझे न छल रहा

दीप बनकर मैं, घनी- काली निशा में जल रहा|
ज्ञानमय पावन सुपथ सह जागरण बन चल रहा|
आप सब के नेह ने, मुझको दिया है हौसला,
इसलिए कठिनाईयों का खल मुझे न छल रहा|

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

उक्त मुक्तक दि़़ 08 -02-2017 की पोस्ट के रूप में मेरे फेसबुक पेज
“Brijesh Nayak की रचनाएं”
में भी पढा जा सकता है

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