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दिसम्बर

Akib Javed

Akib Javed

मुक्तक

December 6, 2017

छंद मुक्त रचना: दिसंबर

साल का अंतिम महीना हूँ
महीनों का मैं नगीना हूँ
गर्मी को मैं देता मात
जाड़े की लाता सौगात
काम धाम सारे छोड़कर
रजाई में अब बैठो ओढ़कर
आग जलाओ चारों ओर
बिना कुछ भी अब सोच कर
मूंगफली का महीना हूँ
हां मै दिसम्बर महीना हूँ
रजाई छोड़ने का मन ना हो
सुबह कँही जाने का दिल ना हो
ओस की बरसात हो
कड़कड़ाते अब दांत हो
हाड कपाती सर्दी हो
कपड़ो से लदा इंसान हो
साल का अंतिम महीना हूँ
महीनों का मैं नगीना हूँ
हां मैं दिसम्बर महीना हूँ।।

®आकिब जावेद

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Author
Akib Javed
मेरा नाम आकिब जावेद हैं। मैं उत्तर प्रदेश में बाँदा जिले के बिसंडा कस्बे में रहता हूँ। पेशे से सरकार का नौकर हूँ। काम अपने मन का करता हूँ। कविता,ग़ज़ल,शायरी लिखने का शौख हैं। लिखता हूँ,कुछ सीख रहा हूँ। https://awajakib.blogspot.com... Read more

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