दिव्य प्रेम

आकर्षणमय प्यार कभी न रुकता, अतिशय शिथिल- दीन है |
सुविधाओं व संसर्गों से प्रकट नेह रोमांच हीन है|
प्रभु के प्रति अनुराग में, जितने निकट ,लगाव उतना उच्च|
“दिव्य प्रेम” में फीकापन न, नित जाग्रत, हर दम नवीन है |

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 1 Comment 1
Views 267

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share