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दिव्य प्रेम

बृजेश कुमार नायक

बृजेश कुमार नायक

मुक्तक

March 1, 2017

आकर्षणमय प्यार कभी न रुकता, अतिशय शिथिल- दीन है |
सुविधाओं व संसर्गों से प्रकट नेह रोमांच हीन है|
प्रभु के प्रति अनुराग में, जितने निकट ,लगाव उतना उच्च|
“दिव्य प्रेम” में फीकापन न, नित जाग्रत, हर दम नवीन है |

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

Author
बृजेश कुमार नायक
एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर,... Read more
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