दिल से उपजाऊ नहीं, ..कोई और जमीन

दिल के जैसा आज तक, नजर न आया खेत !
कुछ भी बो कर देख लो, मिलता सूद समेत !!

जब जब बोऊँ गम यहाँ,हो जाऊं ग़मगीन !
दिल से उपजाऊ नहीं, ..कोई और जमीन !!
रमेश शर्मा

Like Comment 0
Views 19

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share