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दिल मेरा कियूं आजकल बेपनाह उदास है

Kapil Kumar

Kapil Kumar

गज़ल/गीतिका

December 2, 2016

एक रचना…………………आपकी नजर

अजीब सी है खलिश अजीब अहसास है
दिल मेरा कियूं आजकल बेपनाह उदास है
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हंसी भी है बुझी बुझी दर्द दिल के पास है
ख़ुश्क सी है जिंदगी अजीब एक प्यास है
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है वजह कुछ भी नही बात न कुछ खास है
दिल भी है ख़फा ख़फा न होश न हवास है
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खुद पे ही कियूं ए दिल अब नही विश्वास है
टूट न अभी जिंदगी बाकी अभी भी आस है
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आज हरेक ढोह रहा अब अपनी ही लाश है
फिर भी हरेक को यहां जिंदगी की तलाश है
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कपिल कुमार
2/12/2016
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Author
Kapil Kumar
From Belgium

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