*दिल में सबके प्यार हो*

दिल में सबके प्यार हो !
कोई ना तकरार हो !!
वैर का ना हो निशाँ!
खुशियों की भरमार हो!!
ग़म की ना दरकार हो!
जीना ना दुश्वार हो!!
पतझड़ ना छाए कभी!
हर तरफ़ ही बहार हों!!
फूल ही बस फूल हों !
ना कहीँ पर ख़ार हों!!
दिल में सबके प्यार हो……

*धर्मेन्द्र अरोड़ा*

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*काव्य-माँ शारदेय का वरदान * Awards: विभिन्न मंचों द्वारा सम्मानित
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