Reading time: 1 minute

दिल में तेरी यादों का अब हरदम रहता मेला है

ग़ज़ल (बह्र – मुतदारिक मख़बून मुसक्किन महज़ूफ
अरकान-फेलुन *7 फे)

दिल में तेरी यादों का अब हरदम रहता मेला है।
फिर भी जाने क्यों मेरा दिल खाली खाली रहता है।।

सूखे पेड़ सभी चाहत के दिल अब रेगिस्तान हुआ।
फिर भी इसमें उम्मीदों का इक झरना तो बहता है।।

क्या होता है इंतजार का मतलब मैने अब समझा।
इक लम्हा भी अब तो जैसे एक सदी सा लगता है।।

मैने आईनों को भी तो झूठ दिखाते है देखा।
जब भी अपना चेहरा देखूं तेरा चेहरा दिखता है।।

माना अंधियारा फैला है चारों ओर “अनीस ” यहां।
दिल के आंगन में यादों का इक दीपक तो जलता है।।
—अनीस शाह “अनीस”

4 Likes · 8 Comments · 26 Views
Copy link to share
Anis Shah
106 Posts · 5.3k Views
Follow 3 Followers
ग़ज़ल कहना मेरा भी तो इबादत से नहीं है कम । मेरे अश्आर में अल्फ़ाज़... View full profile
You may also like: