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** दिल बाग़-बाग होता है **

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

कविता

April 10, 2017

दिल बाग-बाग होता है

जब

हाथ कलम पर चलता है

अफ़सोस गुस्ताख़ मुरीद

पर

जब हाथ मेरा चलता है

दिल रोता है

आँख नम होती है

परेशां ग़म-ए-शाम होती है ।।

?मधुप बैरागी

Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि... Read more
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