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दिल पंछी

Ranjeet GHOSI

Ranjeet GHOSI

कविता

October 8, 2017

आज दिल पंछी बन,फिर उड़ चला
हवा के समंदर में डूबकियां लगा
बसानी थी मंजिल उसे भी कही
ना था मगर अपने घर का पता
सरहद परिदों की होती नहीं
वनाया नहीं घोंसलों का पता
कास में भी परिंदा बन जाऊ
जाऊ जंहा जी चाहे
जी करे जंहा बस जाऊ

रचनाकार
रंजीत घोसी

Author
Ranjeet GHOSI
PTI B. A. B.P.Ed. Gotegoan
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