गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

दिल तुझ पर हम अपना हार बैठे

दिल तुझ पे हम अपना हार बैठे।
सागर में कसती….. उतार बैठे।

हसरतों को दी जब उड़ान हम ने।
सारी हदें हम अपनी भुला बैठे।

मिलता है प्यार नसीबों से अपने।
हम नसीब अपना आजमा बैठे।

फितरत में नही है वेवफाई हमारे।
हम अपना दिल ओ जान लूटा बैठे।।

सुना था किताबो में कि,होता है
खुदा मंदिर और मस्जिद में यारो।

मिला नही जो रब हमे कहि भी
हम उन को अपना मसीहा बना बैठे।

दिल उन से हम अपना लगा बैठे।।

✍💞#संध्या चतुर्वेदी 💞
#मथुरा उप

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नाम -संध्या चतुर्वेदी शिक्षा -बी ए (साहित्यक हिंदी,सामान्य अंग्रेजी,मनोविज्ञान,सामाजिक विज्ञान ) निवासी -मथुरा यूपी लेखन विधा-कविता ,गजल,संस्मरण, दोहा,कुण्डलिया,मुक्तक,हाइकु ,तांका, त्रिवेणी विधा,क्षणिकाएं, लघुकथा, कहानी और लेख लिखना,नृत्य ,घूमना परिवार के साथ…
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