मुक्तक · Reading time: 1 minute

दिल को मोम की तरह पिघलने न दीजिए

दिल को मोम की तरह पिघलने न दीजिए
भरी महफ़िल में अश्क बहनें न दीजिए
हालात को मुट्ठी में कैद कर लिजिए
ज़माने को कुछ भी कहने न दीजिए

नूरफातिमा खातून” नूरी”

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