Skip to content

$$~~ दिल को छूती -बेटी की बातें~~$$

अजीत कुमार तलवार

अजीत कुमार तलवार "करूणाकर"

कविता

February 21, 2017

ऑफिस से थक कर
जब में पहुंचा अपने घर
तो था बड़ा
परेशां
सोचा की थकावट उतार कर
खुद को संभाल लूं
सोच कभी पूरी
नहीं होता
सब जानते हैं
बस पल बिता था
की मेरी नन्ही सी परी
लिपट गयी भाग कर
पापा आये, पापा आये
कुछ पल तो मैंने
उस के संग थे बिताये
उस की ख़ुशी के लिए
वरना वो कहती है
मम्मी क्या पापा
घर में बस सोने की लिए आये
सुन चूका था में
इन शब्दों को कई बार
पर क्या करून था बड़ा लाचार
सामने सुनकर उस की
माँ से में हो गया और भी लाचार
भूल गया अपनी थकावट
ले चला उस को बहलाने को
कभी कंधे पर
और कभी थोडा बाज़ार
मन था बड़ा व्याकुल
इस विपदा को कैसे कहूं
कौन सुनेगा मेरी
क्यूं की सब का मुझ पर
जो पड़ गया भार
नहीं तोड़ सकता था
उस मासूम के कथन को
नहीं ला सकता था
आंसू उस की आँखों पर
भूल गया सब कुछ
बस याद रहा तो वो बचपन
जो मैने कभी
बिताया था
अपने पापा के कंधे पर चढ़कर
समझ सकता हूँ वो
कल्पना कर सकता हूँ वो
जिस की फ़रियाद में
न जाने कितने
मासूम से बच्चे
जिन के पापा मेरी तरह
और उनकी तरह तो रोजाना
घर से निकलते हैं
इस पापी पेट की खातिर
सहन करते हैं
ऑफिस की न जाने कितनी बाते
जो खुद को गवारा नहीं होती
बस उन चेहरों के
लिए
यह जिन्दगी तो है..बस जीनी पड़ती ….

अंत में..
जिन्दगी तो जिन्दा दिली का नाम है दोस्त
मुर्दे क्या खाक जिया करते हैं…
हम तो सफर पर रोजाना निकलते हैं
यह सोच कर…की जिन्दा हैं तो हैं ??
वरना कफ़न में लिपट कर मिला करते हैं !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

Author
अजीत कुमार तलवार
शिक्षा : एम्.ए (राजनीति शास्त्र), दवा कंपनी में एकाउंट्स मेनेजर, पूर्वज : अमृतसर से है, और वर्तमान में मेरठ से हूँ, कविता, शायरी, गायन, चित्रकारी की रूचि है , EMAIL : talwarajit3@gmail.com, talwarajeet19620302@gmail.com. Whatsapp and Contact Number ::: 7599235906
Recommended Posts
****मैं और मेरे पापा****
माँ का प्यार कैसा होता है । पापा के सीने से लगकर ही यह जाना है । माँ की सूरत तो नहीं देखी है ।... Read more
ओढ़ तिरंगे को
ओढ़ तिरंगे को क्यों पापा आये है? माँ ! मेरा मन, क्यों समझ न पाये है? पापा मुन्ना मुन्ना ,कहते आते थे, टॉफियाँ खिलौने भीे,... Read more
तुम नहीं आये.... चाँद सितारे सारे आये तुम नहीं आये तन्हा दिल रोये घबराये तुम नहीं आये दर्द ए दिल अफसाने क्या बेबस इश्क तराने... Read more
संस्मरण
संस्मरण-पहला प्यार। लोग कहते है- "पहला प्यार भुलाये,नही भूलता" अनायास ये सवाल जहम में रोधने लगा,हर बार की तरह गर्मी की दुपहरी थी और मै... Read more