कविता · Reading time: 1 minute

दिल की बात

मैं कहूँ तुम सुनते रहो
तुम कहो मैं सुनती रहूँ
प्यार के दो मीठे अल्फाज

तुम मुझे देखतो रहो
बस मैं तुम्हें देखती रहूँ
छोड़ दुनिया की शर्म ओ लाज

तुम्हारी हँसी मेरे होंठों पर आए
मेरी हँसी तुम्हारे होंठों पर आए
दुआ करो हो जाए ऐसी करामात

मेरे आँसू तुम्हारी आँखों से झलकें
तुम्हारे आँसू मेरी आँखों से झलकें
दुनिया भी करे हम दीवानों को याद

तुम्हारे दिल में मैं बसी रहूँ
मेरे दिल में तुम बसे रहो
उस खुदा से इतनी सी है फरियाद

तुम्हारी बाहों में मैं आ जाऊँ
मेरी बाहों में तुम आ जाओ
कहीं बीत ना जाए आज की रात

दिल तुम्हारा धड़के मेरे लिए
दिल मेरा धड़के तुम्हारे लिए
सुलक्षणा ने कह दी दिल की बात

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Author
लिख सकूँ कुछ ऐसा जो दिल को छू जाये, मेरे हर शब्द से मोहब्बत की खुशबु आये। वर्ष 2014 से लेखन/साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय हूँ और हिंदी, हरियाणवी में…
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