कविता · Reading time: 1 minute

दिल की बातें

मुझे क्या कहना है
किसी से
वह तो
मैं बस यूं ही
कभी कभी
किसी को
अपना समझकर
अपने दिल की कह
लेती हूं
कभी कभी
इस गहन खामोशी के दौर में
मुझे यह डर भी सताता है कि
किसी रोज ऐसा न हो कि
मैं किसी से कुछ कहना ही
बंद कर दूं
बातें करनी भूल जाऊं
अपने दिल की बातें
किसी के सामने रखने में
हिचकिचाऊं
दिल, दिल की बातें और
उन्हें एक दूसरे से बातचीत के जरिए
बांटना
जैसी भी कोई चीज होती है
यह ख्याल भी कहीं एक कोने में रखकर
उसे बिसराऊं।

मीनल
सुपुत्री श्री प्रमोद कुमार
इंडियन डाईकास्टिंग इंडस्ट्रीज
सासनी गेट, आगरा रोड
अलीगढ़ (उ.प्र.) – 202001

2 Likes · 2 Comments · 218 Views
Like
444 Posts · 30.7k Views
You may also like:
Loading...