गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

दिल की दिलजोई न करेंगे

मुश्किल है मगर अब हम दिल की दिलजोई न करेंगे
नमनाक आंखों से हसेंगे छुप छुप के आहें भी भरेंगे

कौन रोकेगा भला अब मुझ को इस दयार में
हम अपने ही आब ए खार के बहाव में बहेंगे

तू मुझको हर हाल में अपना सगा सा लगता है
पर इस बात को भी अब हम दीवार से न कहेंगे

ये रात की दीवारें सुनती थी जो तेरी मेरी कहानी
उसके पेशानी पर तेरे वाबस्तगी में कोई बात न धरेंगे
~ सिद्धार्थ

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