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दिल का परिंदा

Rishav Tomar (Radhe)

Rishav Tomar (Radhe)

मुक्तक

March 17, 2017

मेरे दिल का आज़ाद परिंदा,मोहबत की गली में भटक गया हैं
किसी की मोहबत के हसीन ख्याबो में, कही पर अटक गया हैं
वो तो छोड़ इस दुनिया को,किसी दूसरी ही दुनिया में रम गया है
एक में हूँ जो उसके इंतजार में तड़प रहा हूँ, पता नहीं वो किस का इंतजार कर रहा है
राधे (ऋषभ तोमर)

Author
Rishav Tomar (Radhe)
ऋषभ तोमर अम्बाह मुरैना मध्यप्रदेश से है ।गणित विषय के विद्यार्थी है।कविता गीत गजल आदि विधाओं में साहित्य सृजन करते है।और गणित विषय से स्नातक कर रहे है।हिंदी में प्यार ,मिलन ,दर्द संग्रह लिख चुके है
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