Skip to content

दिलों में आज भी अपने तिरंगा मुस्कुराता है

Pritam Rathaur

Pritam Rathaur

मुक्तक

May 11, 2017

2122- 2122- 2122- 212
( 1 )
तू ही सोनी तू ही —–लैला तू ही मेरी हीर है
तू ही मेरे दिल की दुनिया तू मेरी तकदीर है

आरज़ू पहली तू ही और जुस्तजू भी आखिरी
जिसने बांधा है मुझे वो जुल्फ की जंजीर है

( 2 )????
दिलों में आज भी अपने तिरंगा मुस्कुराता है
भगत सुखराज वो बल्लभ वो गंगा मुस्कुराता है
—–??—-
वो टूटी झोपड़ी में सो सूखी रोटी ही खाकर
जो ‘जन गण मन’ कोसुनकर वोनंगा मुस्कुराता है
——-??—-
बड़े ही शान से कहता भारत आन है अपनी
फलक पे जिस तरह तारों में चंदा मुस्कुराता है
( 3 )
नहीं मिला है मुझे अब भी हमसफर मेरा
अभी तलाश — उसे कर रहा जिगर मेरा
??
क़दम हैं मां के जहां — है वहीं ये सर मेरा
उसी की आज दुआ — से चले है घर मेरा
??
बहुत हुई थी —- मसर्रत दिया जलाया तो
मुझे ख़बर भी न थी जल रहा था घर मेरा

Recommended
ये माना घिरी हर तरफ तीरगी है
ये माना घिरी हर तरफ तीरगी है मगर छन भी आती कहीं रोशनी है न करती लबों से वो शिकवा शिकायत मगर बात नज़रों से... Read more
आहिस्ता आहिस्ता!
वो कड़कती धूप, वो घना कोहरा, वो घनघोर बारिश, और आयी बसंत बहार जिंदगी के सारे ऋतू तेरे अहसासात को समेटे तुझे पहलुओं में लपेटे... Read more
आस!
चाँद को चांदनी की आस धरा को नभ की आस दिन को रात की आस अंधेरे को उजाले की आस पंछी को चलने की आस... Read more
क्यू नही!
रो कर मुश्कुराते क्यू नही रूठ कर मनाते क्यू नही अपनों को रिझाते क्यू नही प्यार से सँवरते क्यू नही देख कर शर्माते क्यू नही... Read more
Author
Pritam Rathaur
मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है... Read more