दिले घन श्याम लिक्खा है

मापनी : 1222 1222 1222 1222
काफ़िया : आम
रदीफ़ : लिक्खा है
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कहे राधा सुने मीरा दिले घन श्याम लिक्खा है/
सदा शबरी दिखे मन मे प्रभू श्री राम लिक्खा है /
मिले मोहन कभी तुमको यही पैगाम दे देना /
सजाया तन सखे तुमसे दिले हरि नाम लिक्खा है/
कहीं मोहन कहीं राधा कहीं पे श्याम दिखते हो ,
बड़ी जालिम सखे दुनियाँ दिले दिल श्याम लिक्खा है/
तुझे दिल में बसा कर मै यही फरियाद करता हूँ/
सजे गुलशन कहे दिलवर ज़मीं पे श्याम लिक्खा है /
नहीं गफलत कभी करना दिले दिलदार बनकर तुम
फिजाओं मे कयामत हो दिले घनश्याम लिक्खा है/
तसव्वुर तिश्नगी अव्वल दिले अल्फ़ाज़ अकबर तुम ,
गुज़ारिश श्याम से करती हिए श्री नाम लिक्खा है /
तसव्वुर = कल्पना तिश्नगी=प्यास ,अव्वल सर्वश्रेष्ठ , अकबर महान
राजकिशोर मिश्र ‘राज’ प्रतापगढ़ी
सर्वाधिकार सुरक्षित

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