कविता · Reading time: 1 minute

“दिलनशी तुम ना होते”

चाँद ना यू शरमाता,
गुलो पे भवरा ना यू मंडराता,

अगर दिल नशी तुम ना होते,

आशिक़ कोई ना बन पता,
शायर कोई ना कहलाता,
गम कोई ना होता,
तन्हाई में कोई ना मुश्कूराता,

अगर दिलनशी तुम ना होते,

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