गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

दिया से दिया जलाते रहिए

दिया से दिया को जलाते रहिए
खुद हंसिए औरो को हंसाते रहिए
नहीं फैले नफ़रतो के बादल
मुहब्बतो के हवाएं बहाते रहिए
औरों से ज़रा हट के सोचिए
भटके को राह दिखाते रहिए
सबसे आगे हो हिन्द हमारा
इस तरह के मंसूबे बनाते रहिए
उफ्फ न निकले ज़ुबां से नूरी
खुद ख़ुदा के वास्ते समझाते रहिए

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नूरफातिमा खातून" नूरी" सहायक अध्यापिका प्राथमिक विद्यालय हाता-3 ब्लाक-तमकुही जिला-कुशीनगर उत्तर प्रदेश पिता का नाम-श्रीअख्तर हुसैन माता का नाम-श्रीमती सबीहा खातून पति-श्री रियासत अली शौक-मुक्तक, छन्दमुक्त कविता लेखन विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं…
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