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दिया जलता रहा

NIRA Rani

NIRA Rani

कविता

October 27, 2016

दिया जलता रहा
सचमुच दिया जलता रहा
घनघोर स्याह रात थी
हॉ अमावस की रात थी
वो दिया जलता रहा
शायद उम्मीदो का दिया था
फक्र से जलता रहा
कही किसी मासूम गरीब की दिवाली
अंधेरे मे न बीत जाए
..वो दिया जलता रहा
कहीं कोई बेबस भूखा न से जाए
वो दिया जलता रहा ..
किसी की की ऑखे दर्द मे भीगी न रह जाए
वो दिया जलता रहा
सच ! उम्मीदो का दिया जलता रहा
निरन्तर जलता रहा
अथक जलता रहा
शुभ दीपावली

Author
NIRA Rani
साधारण सी ग्रहणी हूं ..इलाहाबाद युनिवर्सिटी से अंग्रेजी मे स्नातक हूं .बस भावनाओ मे भीगे लभ्जो को अल्फाज देने की कोशिश करती हूं ...साहित्यिक परिचय बस इतना की हिन्दी पसंद है..हिन्दी कविता एवं लेख लिखने का प्रयास करती हूं..
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