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दिन शायराने आ गए…….

Ramesh chandra Sharma

Ramesh chandra Sharma

गज़ल/गीतिका

August 9, 2016

यूं लगा दिन ज़िंदगी में शायराने आ गए
अब गज़ल के काफिये हम को निभाने आ गए |

अब बड़े भाई को दादा कौन कहता है यहाँ
क्या बताएं यार अब कैसे ज़माने आ गए |

सांस बाक़ी जिस्म में थोड़ी हरारत शेष हैं
दोस्त मेरे देखिये कान्धा लगाने आ गए |

किस कदर बेताबियाँ थीं इश्क में हम क्या कहें
देखिये आंसू हमें भी अब छुपाने आ गए |

दिल परायों ने नहीं अपनों ने तोड़ा था मगर
देखिये नादानियां फिर दिल लगाने आ गए |

पाँव तो धंसने लगे हैं रेत में पर क्या करें
हम यहाँ बस सीपियाँ मोती उठाने आ गए |

आज तो यूं लग रहा है छत बचेगी या नहीं
देखिये तूफां की ज़द में आशियाने आ गये |

सिर फिरे हैं लोग सारे “आरसी” इस गाँव के
थान ले कर रेशमी किस को दिखाने आ गये |

–आर० सी० शर्मा “आरसी”

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Author
Ramesh chandra Sharma
गीतकार गज़लकार अन्य विधा दोहे मुक्तक, चतुष्पदी ब्रजभाषा गज़ल आदि। कृतिकार 1.अहल्याकरण काव्य संग्रह 2.पानी को तो पानी लिख ग़ज़ल संग्रह आकाशवाणी कोटा से काव्य पाठ कई साहित्य सम्मान एवं पुरुस्कारों से सम्मानित

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