दास्तान-ए-मोहब्बत

मैं कोई शाम सा ठहरा ही रहा ,
तू वक़्त सी थी गुजर जो गयी ,
मेरे दिल पर तुम्हारा ही तो पहरा ही रहा
लबों से छू लू ऐसी कोई बात नही ,
तुम्हें एक पल ना सोचू ऐसी कोई रात नही ।
तू बूँद सी बादलों से बरसती रही ,
मैं दरिया बन यू ही बहता ही रहा ।
मांगू जो कभी खुदा से जिक्र तेरा ही रहा ,
हर ख़्वाब जब आयी तो फ़िक्र तेरा ही रहा ।
मेरी धड़कनों को जो थाम ले वो बस तुम ही हो ,
मेरी हर ख़्वाब को भी बुन ले बस तुम ही हो ।
धड़कनों को भी धड़कना अब जरुरी नही ,
ये सब लिखना मेरी कोई मज़बूरी नही ।

:-हसीब अनवर

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 5 Comment 2
Views 62

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share