.
Skip to content

दास्तां

Govind Kurmi

Govind Kurmi

शेर

December 13, 2016

बचपन में थी मोटी अब वो हूर हो गई ।

चांद भी सरमा जाऐ वो ऐसा नूर हो गई ।

यूँ चली दास्तां हमारी आशिकों में मशहूर हो गई ।

पाकर इश्क हमारा वो भी कुछ मगरूर हो गई ।

हुस्न और इश्क के गुमान में वो यूँ चूर हो गई ।

नजरों तले रहकर भी वो दिल से दूर हो गई ।

Author
Govind Kurmi
गौर के शहर में खबर बन गया हूँ । १लड़की के प्यार में शायर बन गया हूँ ।
Recommended Posts
कहती गई
सच तेरी मुहब्बत में हमेशा,मैं यूँ ही बहती गई , मुहब्बत की दरिया में बह,आज यहाँ आ गई, याद है मुझे वो लम्हे,जो कभी गुजारा... Read more
कातिल  तेरी मुस्‍कान यह अजब खेल कर गई  , हर लिया हमारा दिल क्‍या गजब खेल वह कर गर्इ,
कातिल तेरी मुस्‍कान यह अजब खेल कर गई , हर लिया हमारा दिल क्‍या गजब खेल वह कर गई , मुस्‍कुरा कर हमारे लिए मुश्‍किले... Read more
आबरू बच गई मुहब्बत की
आग फिर इश्क़ की लगाया है बज़्म में यूँ मुझे बुलाया है आबरू बच गई मुहब्बत की कब्र पर वो मेरी जो आया है खाक... Read more
??◆ प्रीत का झूला◆??
हुश्नो-शबाब से दिल मेरा,वो चुराके चली गई। अपनी मीठी बातों से,वो बहलाके चली गई।। फुरसत में तराशा हुआ पूरनूर बदन क़सम से। लता-सी बलखाके दिल... Read more