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दास्तां ए दर्द

दास्तां ए दर्द
कुछ टूट गया
कुछ छूट गया
रब रूठ गया
सब छूट गया
रिश्ता दिल का
दिल से ही था
तुम जब से गए
दिल टूट गया
दिल के टुकडे
अब जुडते नहीं
हम हंसते हैं पर
हंसते नहीं
एक सूनापन
एक खालीपन
हर पल हमको
तडपाता है
अब कैसे तुम्हें
हम बतलाएं
हम पर क्या
है बीत रहा
लगता है कुछ
अंदर अंदर
दरक रहा औ
टूट रहा
मुश्किल है जीना
लेकिन फिर भी
जीवन हम जीते हैं
कुछ भी नहीं
अब पास मेरे
हाथ हमारे रीते हैं
रिश्ता दिल का
अब दर्द से है
ये दर्द बडे़
बेदर्द से है ।

अभिलाषा चौहान
स्वरचित
जयपुर, राजस्थान

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Abhilasha Chauhan
Abhilasha Chauhan
जयपुर
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मेरा नाम अभिलाषा चौहान है और मैंने हिन्दी साहित्य में एम. फिल किया है। अध्ययन...
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