कविता · Reading time: 1 minute

दामन मे आग

खोया सपनो की दुनिया मे
रातों की नींद गंवा बैठा
कल आज की चिन्ता मे
उम्र अपनी बीता बैठा ।

अंधकार के गहरे सायों मे
उजाले का दीपक बुझा बैठा
झूठे आडंबर की चाहत मे
हंसने की कला भुला बैठा ।

प्रेम प्यार के जीवन मे
घृणा का बीज उगा बैठा
अंहकार क्रोध की ज्वाला मे
दामन मे आग लगा बैठा ।

माया के भ्रमित जाल मे
पाप की गठरी भर बैठा
परम ज्ञान की आशा मे
प्रभु शरण मै आ बैठा ।।

राज विग 07.12.2018

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