मुक्तक · Reading time: 1 minute

दाना पानी के सिलसिले

दाना-पानी के सिलसिले परदेश में ले जाते
बच्चे माँ-बाप से बिछड़, अपनी जीविका कमाते।
बूढ़ो की अपनी मजबूरी नीरस जीवन जीते
एक समय लाचार हो, शरण वृद्धाश्रम पाते।

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