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दादी अम्मा

हमने कभी जवान देखा नहीं जिसे
जो हमको जवान होते देखना चाहती है
मम्मी पापा से भी ज्यादा, जो प्यार
करती है हमें, वो ही दादी कहलाती है।।

आज हाथों में डंडा है सहारे के लिए
कल सहारा देती थी हमें चलने के लिए
अभी भी अपना सारा काम कर लेती है वो
बूढ़ी हो गई है वो, बस कहने के लिए।।

जो छोटे थे हम तो हमें मेले में ले जाती थी
हमारी ज़िद्द पर हमको झूला भी झूलाती थी
जब बचपन में करते थे शरारतें, तो हमें
मम्मी पापा की डांट से भी वही बचाती थी।।

याद है मुझको वो राजा रानी की कहानियां
जो बचपन में दादी सुनाया करती थी
डर जाते थे सब बच्चे जब दादी हमको
भूत प्रेत की कहानियां सुनाया करती थी।।

सुकून मिलता था फिर उनकी ही गोद में
ना जाने कब नींद आ जाती थी
मेरा मनपसंद खाना भी बन जाता था
जब तक आंखें मेरी खुल जाती थी।।

अब तो बड़े हो गए है हम भी,
लेकिन उसके लिए अभी भी बच्चे है
मौसम नहीं है फलों का लेकिन,
सूखाकर फल मेरे लिए बचाकर रखें है।।

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Author
कवि एवम विचारक
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