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“दाखला”

indrajeet singh lodhi

indrajeet singh lodhi

कविता

February 1, 2017

“दाखला”

एक अबला सी नारी।
बेबस बेचारी।।
डरती सहमती सकुचाती।
विद्यालय की ओर जाती।।
पांच बर्ष का मासूम सा नोनिहाल।
जो तन से था बिल्कुल फटेहाल।।
वह विद्यालय के परिसर में खड़ी थी।
तभी एक नई घटना उसके साथ घटी थी।।
जब वह बच्चे का दाखला करने को कहती है।
तभी एक अध्यापिका उससे प्रश्न करती है।।
अध्यापिका ने कहा बच्चे के पिता का नाम बताओ।
उसने कहा माॅ के नाम से काम नहीं चलेगा बताओ।।
अध्यापिका ने कहा बच्चे के पिता का नाम होगा।
तो ही विद्यालय में बच्चे का दाखला होगा।।
ये सुनकर उसके मन के सारे तार झनझना गऐ।
और अगले ही पल सारे हादसे याद आ गए।।
आॅख से छलक गया निर्झर पानी।
वो बता ना पा रही थी अपनी राम कहानी।।
दर्द जैसे डंक चुभा रहे हों।
जैसे उसकी आपबीती कह रहे हों।।
बो बोली कैसे आपबीती सुनाऊं।
इसके कौन से बाप का नाम बताऊं।।
समाज में सभी ने मुझे छला है।
उसके बदले ही ये फल मिला है।।
वो जो दरोगा बड़ी बड़ी मूझों वाला है।
कहलाता कानून का रखबाला है।।
मैने मांगी थी उससे सुरक्षा।
बदले में दे गया ये भिक्षा।।
या वो नेता जो बड़े बंगलों में रहता है।
हमेशा अपने ही विकास की बात करता है।।
उसने भी तो खराब की थी मेरी कहानी।
उसकी भी हो सकती है ये निशानी।।
या वो जो मरीजों का भगवान है।
उसके अंदर भी एक शैतान है।।
उसने कब मुझ दुःखिया का दर्द बांटा था।
उसने भी तो मेरे वदन को काटा था।।
या वो जिसने मेरे बचपन को रोंदा था।
नाम था सुखिया वो था गांव का मुखिया।
जिसे पेट की खातिर मेरे अपनों ने मुझे बेचा था।।
नारी मर्दन के पहले चौराहे पर मुझे खड़ा किया था।।
ये सभी तो इसके बाप हैं।
मेरे जीवन के पाप हैं।।
जीवन भर इनसे लड़ी हूं।
आज देह के बाजार में खड़ी हूं।।
किस पिता का नाम बताऊं।
कैसे मन की पीर सुनाऊं।।
जात बिरादरी का साक्ष ना मुझसे लीजिए।
राम रोमियो रहीम कुछ भी लिख लीजिए।।
इसको इंसान बनाना मेरी चाह है।
मैने देखी उसी वक्त की राह है।।
ये वही वहसी दरिंदा ना बन जाए।
फिर से मेरी जैसी कहानी ना दोहराए।।
बड़ी आस लेकर आपके पास आई हूं।
इसलिए इसे विद्यालय लेकर आई हूं।।
मेरे दुःख दर्द पर ध्यान दीजिए।
बस मेरे बच्चे का दाखला कर लीजिए।

रचयिता – इंद्रजीत सिंह लोधी

Author
indrajeet singh lodhi
योगाचार्य और रंगकर्मी के रूप अपने को स्थापित किया लिखने का शौक वचपन से ही रहा आकाशवाणी से रचनाऐं प्रसारित ।गद्द एवं पद्द दोनों पर लिख रहा हूं अभिनय एवं निर्देशन में कार्यरत
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