दहेज़

*दहेज पर मेरी छोटी सी कविता*

दहेज़रूपी राक्षस का दमन होना चाहिए।
इस झूठी शान शौहरत का खात्मा होना चाहिए।

बहु को ससुराल में बेटी का दर्जा मिलना चाहिए,,,,,
बाबुल के आँगन के जैसी ही रौनक मिलनी चाहिए।

सास सुसर के हितार्थ बहु को सोचना चाहिए।
जिंदगी की हर खुशियों का तरु ससुराल में ही पनपना चाहिए,।

चंद रुपयों की ख़ातिर बेटियों का गला नही दबोचना चाहिए,,,,
ऐसे दहेज लालची और लोभियों के घर बेटी
ब्याहाना नही चाहिए।

दहेज़ जैसी गंभीर बीमारियों से लड़ने को एक जुट होना चाहिए,,,,
जो मांगे दहेज उन्हें चप्पल खिलाना ,जेल दिखाना चाहिए।।।।

दहेज के इस कोढ़ी रोग को जड़ से मिटाना चाहिए,,,।
बेटी को पढा लिखा कर कुछ लायक बनाना चाहिए।

बेटी होती बाबुल की बगिया का फूल उसे मुरझाने देना नही चाहिए,,।
देख परख कर ही रिश्ता उसका अच्छे घर करना चाहिए,,,,।।।

शादी से पहले दोनों पक्ष हर पहलू पर सोच विमर्श करना चाहिए,,,,,।
जो करे मांग दहेज की उसे जलील और अपमान करना चाहिए।

समाज मे ऐसे दहेज के भूखे लोगों का बहिष्कार करना चाहिए,,,,,
अपनी बेटियों को दहेज की खातिर जलने से बचाना चाहिए।

*रचनाकार-गायत्री सोनू जैन*
*सहायक अध्यापिका मंदसौर*
*मोबाइल नंबर 7772931211*

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