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**दहेज**

“दहेज”
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विवाह सिर्फ संस्कार है, इसे करे जो भाय।
यदि मांगता वो दहेज, धन ही उसे लुभाय।।
धन ही उसे लुभाय, उसको यह समझाइये।
शिकायत फिर जरूर, थाना में लिखवाइये।।
कह “पीके” कविराय, कोई घर न हो तबाह।
सुखमय हो संसार , जो घर हो सही विवाह।।

स्वरचित सह मौलिक
…✍️पंकज “कर्ण”(pk)
…………….कटिहार

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Author
"शिक्षक"... MA. (Hindi, Psychology & Education) B.Ed , LL.B (BHU),
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