दहशत

दहशत
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2020
ये साल क्या आया
जैसे कोई तूफान सा आया,
अभी हमने होली का रंग
भी नहीं खेला था कि
तोहफे में बेशर्म कोरोना आया।
होली,ईद,तीज,नागपंचमी
शिवरात्रि ही नहीं
आजादी का जश्न भी इसनें
यहीं जमकर मनाया।
लोगों को क्या क्या दिन दिखाया।
मेहनत मजदूरी करके किसी तरह
जो बच्चों का पेट पालते
परिवार चलाते थे।
उन्हें जान का भय दिखा इसनें
उनको कहाँ से कहाँ तक भगाया।
जाने कितने बेबस लाचार
घर पहुँचने की जगह
काल के गाल में समा गये।
बेबस लाचार माँ बाप की गोद में ही सदा के लिए सो गये।
सड़कों पर प्रसव का दंश भी झेल गये
कैसे कैसे जतन कर लोग भाग रहे थे
कुछ रास्ते में ही
सदा के लिए साथ छोड़ रहे थे।
लोग लाचार परेशान
जीवन का मोह लिये
सब बर्दाश्त कर रहे थे।
जो बचे हैं वे भी अभी भी
अधिकांश लाचार ही हैं,
रोजी रोटी के मार्ग में
अंधकार बहुत है।
अब तो बस चहुँओर एक ही चर्चा है,
क्या हम 2021 देख पायेंगे?
कोरोना राक्षस के संग
कब तक जी पायेंगे?
या कोरोना वैक्सीन की आस लिए
हम भी 2020के संग
इस दुनियां से विदा हो जायेंगे।
✍सुधीर श्रीवा

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