Skip to content

दस्तक ..वक्त और उम्र की

NIRA Rani

NIRA Rani

कविता

September 6, 2016

दस्तक ! वक्त और उम्र की ..

अचानक वक्त और उम्र की दस्तक से हैरान हो गई
किसे मिलूं किसे समझूं परेशान हो गई
मैने कहा आओ बैठो …
वक्त बोला ..मै कही ठहरता नही
उम्र बोली ..मै कही ठहर जाउं ये मुमकिन नही

तुम्हे हर कदम हर वक्त हमारे साथ चलना होगा
हर वक्त पे यकीं ..हर दौर को सहना होगा

मै बोली ..साथ चलने के लिए
अपनी नादानी ..अपनी जवानी
अपना बचपना ..अपना अल्हडपन
सब पीछे छोडना होगा ..

वक्त बोला ..मै यूं ही नही गुजर जाऊंगा!
गुजरते वक्त मे कई तब्दीलियॉ कर जाऊंगा
बेशुमार नसीहते ..और अनगिनत सीख दे जाऊंगा
कुछ अच्छा और कुछ बुरा वक्त दिखा जाऊंगा

उम्र बोली .मै भी यूं ही नही गुजर जाउंगी ..
ढलती उम्र के कई पडाव दे जाउंगी
कभी बचपन तो कभी जवानी की दहलीज पर इतराउंगी
कभी बुढापे पर असहनीय पीर दे जाऊंगी

कुछ ऑखो मे नमी देकर
तुम्हे साथ ले जाउंगी
मै उम्र हं……
नीरा रानी …..

Author
NIRA Rani
साधारण सी ग्रहणी हूं ..इलाहाबाद युनिवर्सिटी से अंग्रेजी मे स्नातक हूं .बस भावनाओ मे भीगे लभ्जो को अल्फाज देने की कोशिश करती हूं ...साहित्यिक परिचय बस इतना की हिन्दी पसंद है..हिन्दी कविता एवं लेख लिखने का प्रयास करती हूं..