कविता · Reading time: 1 minute

दर्पण है व्यवहार

व्यवहार हैं
दर्पण
इन्सान का
यहीं है
संस्कार
जीवन के

होती तारीफ
सब जगह
कुशल व्यहार की
होता सफल
वही जीवन में

बनाते
माता-पिता
कुशल व्यवहार
बच्चों को
जो अपनाता
जितना जीवन में
रहता खुश
जीवनपर्यन्त
जीवन में

व्यवहार है
ऐसा गहना
जो करता
सज्जा
मानव का
होता प्रिय
वह सब का
बुजुर्गों का
यह हैं कहना

स्वलिखित
लेखक संतोष श्रीवास्तव भोपाल

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