Apr 7, 2021 · कविता

दर्द

दर्द

दर्द का पारावार नहीं
आ बसता हर कहीं
बंद करो कपाट लगा दो सौ ताले
एक टूटी फाँक भी खोज निकाले
नहीं चाभी का मोहताज
घुसपैठिया आँगन करे नाच

रेखांकन।रेखा

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दिल से दिलों तक पहुँचने हेतु बाँध रही हूँ स्नेह शब्दों के सेतु। मैं एक...
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