मुक्तक · Reading time: 1 minute

दर्द

1.
बात तो तब बने जब दर्द पे अपने रोएं दूसरे
खुदी का खुद पे रोना भी भला कोई रोना है !
~ सिद्धार्थ
2.
उसकी याद और तनहाई का घर है दिल
अक्ल को किरायेदार रखता नहीं है दिल
~ सिद्धार्थ
3.
मैं क्यूं करूं सवाल कि क्यूं तुम सोए नहीं हो यार
चांद के सीने पे पलकों से लिखना बचा था अभी प्यार !
~ सिद्धार्थ

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