कविता · Reading time: 1 minute

दर्द दिल की बता दवा क्या है

दर्द दिल की बता दवा क्या है
प्यार का अब मिला सिला क्या है

बात हर रोज हुआ करती थी जो
अब बता दे मिली सजा क्या है

चाह का जब नशा बढ़ा इतना
पर तुझे हासिले दगा क्या है

बात ज्यादा हदें बढ़ी तो मैं
पूछ बैठी कि फैसला क्या है

साथ रहना न हो सकेगा जब
मूर्ख जो मैं बनी कला क्या है

कैद हो कर नजर मिली तुझसे
आस का तब महल बना क्या है

शूल तेरे लिए सजाये जो
हो गया वो तभी दुआ क्या है

याद में जब चला कभी आये
तब हँसा दे मुझे अदा क्या है

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डॉ मधु त्रिवेदी शान्ति निकेतन कालेज आफ बिजनेस मैनेजमेंट एण्ड कम्प्यूटर साइंस आगरा प्राचार्या, पोस्ट ग्रेडुएट कालेज आगरा *************** My blog madhu parashar.blogspot.in Meri Dunia कोर्डिनेटर * राजर्षि टंडन ओपन…
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