Skip to content

**दर्द जो कोई कहता नहीं **सिर्फ सहता**

Neeru Mohan

Neeru Mohan

मुक्तक

February 26, 2017

*माँ के न होने का दर्द
एेसा होता है
जो कोई कहता नहीं है
सिर्फ सहना होता है

*यह दर्द तो सिर्फ
वही बता सकता है
जिसने अपनी माँ को खोया है
रोज़ तिल-तिल के मरा
और रो-रो के सोया है

*हे भगवान! तूने क्या
मुझको दिया
जो मेरा था
वह भी तूने
वापस ले लिया

*एक माँ दी थी
जो तूने मुझ को
दुख में सुख में
जो साथ रहती थी मेरे

*इतने साल बीत गए
न देखी सूरत उसकी
न सुनी बोली उसकी मैंने

*क्यों तूने यह सब
मेरे साथ किया
माँ मेरी छीनकर
क्यो मुझे अनाथ किया

*किसको मैं अपना कहूँ
यह सब दुख
किसको सुनाऊँ
कौन है वह
जिसके में गले लगकर
अपना गम भुलाऊँ

*नहीं है कोई दुनिया में ऐसा
जिसको सुनाऊँ
दुख दर्द अपना मैं
एक जो थी माँ मेरी
उसको भी तूने
मुझसे छीन लिया है

*उसको अपनी
दुनिया में बुलाकर
मेरी इस दुनिया को
तूने क्यो उजाड़ दिया
ये सब करके
तुझको क्या हासिल हुआ

*न रो सकी में खुलकर
किसी के सामने
न दर्द अपना कह सकी
किसी को अपना बनाकर

*मतलबी है यह दुनिया
मतलबी है लोग यहाँ के
जिसको समझो अपना
वही दे जाता है गम
पराया बना के

*हे माँ !तू कहाँ चली गई
मुझको इस अंधेरी
दुनिया में छोड़कर
किससे कहूँ मैं अपना
दुख दर्द उसके
कंधे पर होकर के

*तुम ही तो थी
जिसको बताती थी
मैं अपनी हर बात
और सुनाती थी
अपने दिल का हर हाल

*जिस दिन से तू गई है
इस लोक से उस लोक
रो-रो कर हर दिन
काटा है मैंने अपना हर रोज

*माँ तेरी कमी मुझे आज
हर पल महसूस होती है
तू नहीं है आज मेरे पास
हर रोज तेरी कमी
मुझे बहुत खलती है

*यह लिख रही हूँ
मगर आज भी मेरी आँखों में
बहुत आँसू है
किससे कहूँ मैं
अपने दिल की हर बात
रोज तेरे बिन में
यूँ ही तड़पती हूँ

*शिकायत मुझे सिर्फ
उस भगवान से ही है
जिसने आज अकेला
मुझे इस दुनिया में छोड़ा है
कोई नहीं है मेरा यहाँ
सिर्फ तेरी यादों का बसेरा है

*तेरे बिना यह सब कुछ
पराया सा लगता है
तू नहीं है तभी तो यह जग
बेगाना सा लगता है

*कहाँ चली गई तू मेरी माँ
ज़रा भी नहीं सोचा तूने
बिन तेरे जीएगी
तेरी बेटी यहाँ कैसे

*हे ईश्वर किसी बच्चे को
उसकी माँ से न जुदा करना तू
अगर दे माँ
तो कभी वापस
माँ न उसकी लेना तू

****कभी वापस माँ
****न उसकी लेना तू

Share this:
Author
Neeru Mohan
व्यवस्थापक- अस्तित्व जन्मतिथि- १-०८-१९७३ शिक्षा - एम ए - हिंदी एम ए - राजनीति शास्त्र बी एड - हिंदी , सामाजिक विज्ञान एम फिल - हिंदी साहित्य कार्य - शिक्षिका , लेखिका friends you can read my all poems on... Read more

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग से अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

साल का अंतिम बम्पर ऑफर- 31 दिसम्बर , 2017 से पहले अपनी पुस्तक का आर्डर बुक करें और पायें पूरे 8,000 रूपए का डिस्काउंट सिल्वर प्लान पर

जल्दी करें, यह ऑफर इस अवधि में प्राप्त हुए पहले 10 ऑर्डर्स के लिए ही है| आप अभी आर्डर बुक करके अपनी पांडुलिपि बाद में भी भेज सकते हैं|

हमारी आधुनिक तकनीक की मदद से आप अपने मोबाइल से ही आसानी से अपनी पांडुलिपि हमें भेज सकते हैं| कोई लैपटॉप या कंप्यूटर खोलने की ज़रूरत ही नहीं|

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you